एक महीने पहले ही 'राग देश' में मैंने लिखा था कि कुछ लोग पाँच सौ और हज़ार रुपये के नोटों को रद्द कर देने के बचकाने सुझाव दे रहे हैं (काले धन पर गाल बजाते रहिए, 8 अक्तूबर 2016). मुझे क्या पता था कि सरकार ऐसा कर भी देगी.
अब ध्यान देने की कुछ बातें :
करेन्सी
का मतलब धन नहीं
होता.
करेन्सी
धन के लेन-देन
का साधन है, धन
नहीं.
करेन्सी
में किसी भी समय
काले धन का बहुत
छोटा अंश ही मौजूद
होता है.
इसलिए
करेन्सी बदलने से काले धन
की सफ़ाई असम्भव है. काले धन
का बहुत मामूली अंश
साफ़ या नष्ट होगा.
उसमें भी ज़्यादातर छोटी
मछलियाँ ही फँसेंगी.
भारत
में पहले दो बार
यह कोशिश हो चुकी है.
म्याँमार में तीन बार
ऐसा किया जा चुका
है. श्रीलंका में भी 1970 में
ऐसा किया जा चुका
है. हर बार विफलता
हाथ लगी.
इस हफ़्ते 'राग देश' में
इसी पर विस्तृत टिप्पणी.