मुसलिम उलेमाओं की मर्ज़ी चली होती तो आज अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय ही अस्तित्व
में न होता! यह बात आज के मुसलिम
युवाओं को जाननी
चाहिए कि देश के साठ से ज़्यादा मुल्ला-मौलवियों ने क्यों सर सैयद अहमद ख़ान के ख़िलाफ़ फ़तवे
जारी किये थे? क्यों उन्हें
'धर्म से बाहर'
घोषित कर दिया गया था? और जब इससे भी बात नहीं बनी तो मौलवी अली बक्श क्यों
मक्का जा कर सर सैयद का 'सिर क़लम कर दिये जाने'
का फ़तवा ले कर आये थे?Blog of Qamar Waheed Naqvi, Editorial Director, India TV; Former News Director, Aaj Tak. www.facebook.com/qamarwaheed.naqvi (See his Page on Hindi Laguage Usage at www.facebook.com/qwnaqvi) twitter.com/qwnaqvi
Sunday, 16 October 2016
Teen Talaq and Muslim Personal Law - इतिहास की दो ‘केस स्टडी’! - raagdesh
मुसलिम उलेमाओं की मर्ज़ी चली होती तो आज अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय ही अस्तित्व
में न होता! यह बात आज के मुसलिम
युवाओं को जाननी
चाहिए कि देश के साठ से ज़्यादा मुल्ला-मौलवियों ने क्यों सर सैयद अहमद ख़ान के ख़िलाफ़ फ़तवे
जारी किये थे? क्यों उन्हें
'धर्म से बाहर'
घोषित कर दिया गया था? और जब इससे भी बात नहीं बनी तो मौलवी अली बक्श क्यों
मक्का जा कर सर सैयद का 'सिर क़लम कर दिये जाने'
का फ़तवा ले कर आये थे?
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